अनुसंधान उपलब्धियां

1 पहली कुनित्ज़ ट्रिप्सिन अवरोधक मुक्त सोयाबीन प्रजाति - एनआरसी 127 मध्यप्रदेश, बुंदेलखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र में किसानों के लिए जारी करने के लिये चिन्हित की गयी। अधिक उपज वाली सोयाबीन की प्रजातियाँ जैसे एनआरसी 2, एनआरसी12, एनआरसी 7, एनआरसी 37 तथा एनआरसी 86 का विकास । इसके अलावा, एनआरसी 7, एनआरसी 37 तथा एनआरसी 86 बीज श्रंखला के अंतर्गत है ।
2 ट्रिप्सिन इनहिबिटर मुक्त सोयाबीन जीनोटाइप्स एनआरसी 101 तथा एनआरसी 102 का विकास एवं व्यावसायीकरण । इस प्रकार के जीनोटाइप्स को सोय आटा बनाने के लिए गेहूँ में मिलाने से पहले उबालने की कोई जरूरत नहीं है । जेएस 97-52 तथा एनआरसी 7 के पृष्ठभूमि में कुनिट्ज ट्रिप्सिन जीनोटाइप्स को भी विकसित किया गया है ।
3 आईसी 210 की पहचान एवं व्यावसायीकरण । 42% ओलिक एसिड के साथ एक उच्च ओलिक एसिड जीनोटाइप 24% वाली सामान्य सोयाबीन के समतुल्य पाई जाती है ।
4 नुल लिपोसिजेनैस-2 (प्रिंसिपल कनट्रिब्यूटर से ऑफ फ्लेवर) के साथ सोयाबीन जीनोटाइप्स को विकसित किया गया है ।
5 सोयाबीन जर्मप्लाज्म का संग्रह, रखरखाव, मूल्यांकन एवं संरक्षण । वर्तमान में हमलोग 4591 असेसन का रखरखाव करते हैं एवं उपयोगकर्ता को आपूर्ति करते हैं ।
6 उच्च तेल की मात्रा, उच्च ओलिक एसिड सामग्री, उच्च प्रोटीन, जंग प्रतिरोध, वाईएमवी टोलेरेंस, फोटो असंवेदनशीलता, दीर्घकालीन प्रौढ़ता, सूखा टोलेरेंस, हिजोक्टोनिया रूट रॉट प्रतिरोध (रेजिसटेंस), गिर्डल बीटल, डैफोलैटर्स हेतु जर्मप्लाज्म असेसन का अभिज्ञान (पहचान) ।
7 मोलिकूलर मार्कर्स का पहचान ग्लाइसिन सोजा की तरह ग्लाइसिन मैक्स में वाईएमवी प्रतिरोध के साथ जूड़ा हुआ है ।
8 100 बीज वजन, प्रति पौधा फली एवं प्रति पौधा बीज उपज के लिए क्यूटीएल का पहचान ।
9 मल्टी पैरेंट एडवांस्ड जेनेरेशन इंटरक्रोस (मैजिक) तथा नेस्टेड एसोसिएशन मैपिंग (एनएएम) आबादी का विकास ।
10 एग्रोइंफेक्शन के माध्यम से सोयाबीन प्रजातियों की स्क्रीनिंग हेतु संक्रामक क्लोन का विकास ।
11 कवकनाशक, कीटनाशक तथा अन्य ग्रॉथ प्रोमोटिंग केमिकल्स का प्रभावशाली वितरण के लिए पतले स्तर वाली पोलिमर कोटिंग का मानकीकरण ।
12 तीन नयी क्षमता वाले अच्छे बैक्टेरियल स्ट्रेंस जैसे पेनिबैसिल्लस मुसिलेजिंस्स, ब्राडिहिजोबियम डेक्यूंजेनस तथा बी. लियोनिंजेनस की खोज हुई, जिसे तीन सूखे टॉलेरैंट लाइंस के जड़ नोडुल्स जैसे इ.सी. 538805, पी.के. 472 तथा इ.सी. 538828 से क्रमानुसार अलग किया गया एवं पहचान किया गया । सोयाबीन का आगे का मूल्यांकन हेतु एबायोटिक स्ट्रेस टोलेरेंस टैट्स के लिए इन स्ट्रेंस का मूल्यांकन किया जा रहा है ।
13 दीर्घकालीन सोयाबीन आधारित फसल प्रणाली से सोयाबीन, गेहूँ तथा मक्का की फसल का हाईजोस्फेयर में बोने एवं सबसे प्रमुख ए.एम. प्रजातियों के रूप में ग्लूमूस इंट्रेरेडिसेस ( हाइजोफेगस ईरेगुलरिय) को पहचाना गया ।
14 निकासी तथा ग्लूमैलिन के वृद्धि वसूली ( ग्लिकोप्रोटीन ) के लिए एक विधी में सुधार किया गया जो पौधे की वृद्धि, पोषण तत्वों को लेने, मिट्टी कार्बन को ग्रहण करने एवं छोड़ने में मुख्य भूमिका निभाती है ।
15 तीन बैक्टेरियल स्ट्रेंस जैसे बैसिल्लस अर्याभट्टै एम.डी.एस.आर. 14 (जेएफ792521) एसिनेटोबैक्टर कैल्कोएसिटिकस बी.के.-5 (जेएफ792523) तथा स्यूडोमोनस मोसेल्लि डीकेएच-3 (जेक्यू773432) का पहचान एवं मूल्यांकन किया गया, सोलूबिलिजिंग जिंक तथा फास्फोरस एवं मिनेरलाईजिंग फिलेट में सक्षम; बिना टीकाकरण के 34% उच्च तुलना हेतु बीज में जिंक संचय समता की वृद्धिरहा है, इसके अलावा अकार्बनिक फास्फेट तथा मिनरलाइज्ड फेटेट को सोलूबिलाइज करते है ।
16 सोयाबीन अनुसंधान (जर्मप्लाज्म सूचना प्रणाली, प्रजाति पहचान प्रणाली, ब्रीडिंग एवं सस्य विज्ञान बहुस्थानिक आ.भा.सं.सो.अनु.प. डाटा हेतु डाटा प्रबंधन प्रणाली तथा रोग निदान प्रणाली) की सुविधा हेतु कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर का विकास ।