संक्षिप्त परिचय

कृषि अनुसंधान परिषद ने सन् 1987 में आधारभूत प्रौद्योगिकी एवं प्रजनन सामग्री सहित सोयाबीन उत्पादन प्रणाली अनुसंधान की सहायता करने हेतु राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र की स्थापना की । सोयाबीन जर्मप्लाज्म हेतु अखिल भारतीय समंवित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना (अ.भा.स.सो.अनु.प.), सोयाबीन प्रजनन बीज उत्पादन (सो.प्र.बी.उ.) एवं राष्ट्रीय सक्रिय संग्रह साइट (रा.स.सं.सा.) की समंवय इकाई को भी राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र में सम्मिलित किया गया है ।


सोयाबीन की आधारभूत एवं सामरिक अनुसंधान हेतु राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र की स्थापना सन् 1987 में की गई थी एवं कालांतर में ग्यारहवीं परियोजना के अंतर्गत इसे निदेशालय बना दिया गया । सन् 1987 में मध्य प्रदेश सरकार ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को खण्डवा रोड, इंदौर पर भण्डार एवं पूर्व कार्यालय भवन सहित 56.7 हे. फार्म राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र की स्थापना हेतु प्रदान किया । भूमि विकास के उपरांत, अनुसंधान प्रयोगों एवं भवन की मरम्मत हेतु पूरे सेट-अप को फार्म के मध्य में रखा गया एवं कालांतर में इस पूरे सेट-अप को अनुसंधान-सह-प्रशासनिक भवन में रखा गया, जहाँ विभिन्न प्रकार की 16 प्रयोगशालाओं का प्रावधान रखा गया ।


वर्तमान परिदृश्य में, सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास में संलग्न भा.कृ.अनु.प.-सोयाबीन अनुसंधान निदेशालय भारत में एक प्रमुख संस्थान के रूप में है । यह संस्थान आधारभूत तकनीकियों एवं प्रजनन सामग्री सहित उत्पादन प्रणाली अनुसंधान को केंद्रीयकृत समर्थन प्रदान कर रहा है । यह अखिल भारतीय समंवित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना के माध्यम से बहु-विषयक एवं बहुस्थानिक अनुसंधान का भी देख-रेख करता है । उद्योगों, एन.जी.ओ., समुदायिक संगठनों एवं किसानों से जुडे‌ समस्त स्टॉकहोल्डर सहित सोयाबीन अनुसंधान निदेशालय एवं अखिल भारतीय समंवित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना के सहयोग से देश में सोयाबीन की क्षेत्रफल, उत्पादन तथा उत्पादकता में अद्वितीय विकास हेतु मार्ग प्रशस्त किया गया ।