• बुनियादी पोषण का एक आर्थिक स्रोत होने के नाते, सोयाबीन देश में प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण का मुकाबला कर सकती हैं। आइसोफ्लावोनेस , टोकोफेरोल और लेसिथिन जैसे न्यूट्रा घटकों में समृद्ध होने के कारण दैनिक आहार में सोयाबीन के उपयोग से कई घातक बीमारियों जैसे स्तन कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, हड्डियों की कमजोरी के खतरे को कम कर सकते हैं। स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के इतने गुण होने के बावजूद, देश में उत्पादित कुल सोयाबीन का केवल 5 % खाद्य उपयोगों के लिए उपयोग किया जाता है। सोयाबीन के स्वास्थ्य लाभ के बारे में कम जागरूकता के अलावा, सोया उत्पादों के बेस्वादपण, ट्रिप्सिन अवरोधक जैसे विरोधी पोषण कारक की उपस्थिति,एवं सोयाबीन में पेट फुलाने वाले घटकों के कारण खाद्य प्रयोजन के लिए सोयाबीन का उपयोग कम होता है। भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान ने अपने फसल सुधार कार्यक्रम में भोजन उपयोग में ले जा सकने वाली प्रजातियों बनाने के लिये अनुसंधान कार्यक्रम तैयार किया है
  • कुनीज़ ट्रिप्सिन अवरोधक मुक्त सोयाबीन : देश भर में सोयाबीन का स्वास्थ्य लाभ उठाने के लिए सबसे आसान तरीकों में से एक चपाती बनाने के लिए सोया मिश्रित गेहूं के आटे का इस्तेमाल करना है। इस प्रयोजन के लिए कुनीज़ ट्रिप्सिन को निष्क्रिय करने के लिए सोयाबीन के बीज को गेहूं के साथ मिश्रण करके पीसने से पहले कम से कम 20 मिनट के लिए उबालने की सिफारिश की जाती हैं । घरेलू स्तर पर इसे उबालने में समय लगता है,इसलिए इस प्रक्रिया को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि सोया खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए यह लागत प्रभावी नहीं है। सोयाबीन संस्थान ने, दो कुनीज़ ट्रिप्सिन अवरोधक मुक्त सोयाबीन जीनोटाइप NRC101 ( INGR10054 ) और NRC102 ( INGR10055 ) विकसित किया है जिसको चपाती बनाने से पहले उबालने की आवश्यकता नहीं है । संस्थान भारत में विभिन्न क्षेत्रों के लिए मार्कर असिस्टेड चयन के माध्यम से कुनीज़ ट्रिप्सिन अवरोधक मुक्त सोयाबीन किस्मों के विकास में लगा हुआ है।
  • लयपोक्सिजेनेज मुक्त सोयाबीन किस्में : सोया उत्पादों में स्वाद बढानें के लिये संस्थान लयपोक्सिजेनेज ( एल्डिहाइड / कीटोन यौगिकों के उत्पादन के लिए जिम्मेदार ) रहित प्रजातियों का विकास कर रहा है. NRC109 एक ऐसी किस्म है जो ल्य्पोक्सिजेनेज २ से मुक्त है
  • वैजीटेबल सोयाबीन : यह विशेष प्रकार की सोयाबीन है जिसके हरे रंग के बीज हरी मटर और हरे चने के समान परयोग किये जा सकते है । वैजीटेबल सोयाबीन नियमित सोयाबीन से स्वाद और बनावट में थोढ़ी अलग है। वैजीटेबल सोयाबीन को ऐसी अवस्था में तोढ़ा जाता है , जब फली गुहा पूरी तरह से भर जाती है और बीज और फली खोल अभी भी हरे रंग में हैं। संस्थान ने हाल ही में ईस प्रयोजन के लिए NRC105 ( INGR10056 ) सब्जी जीनोटाइप विकसित की है।
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